स्क्रीन के उस पार: एक माँ, एक उम्मीद और टेलीमेडिसिन का चमत्कार”

धनेरा गाँव, अपने हरे-भरे खेतों और नीले आसमान के लिए जाना जाता था।
सुबह की शुरुआत चिड़ियों की चहचहाहट और बच्चों की किलकारियों से होती थी।
हर घर में सुख, चैन और प्यार का माहौल था।

सरिता देवी का छोटा परिवार — बेटा अर्जुन और बेटी गुड़िया — उनकी दुनिया की धड़कन थे।
हर शाम, सरिता बच्चों के साथ मंदिर जातीं, और भगवान के आगे हाथ जोड़कर कहतीं:

सरिता:

“हे भगवान, बस मेरी दुनिया को सलामत रखना। मेरे बच्चों को हमेशा मुस्कुराते देखना।”

गाँव के लोग सरिता की खुशियों पर रश्क करते थे।
सब कुछ परफेक्ट था — जैसे कोई सुंदर सपना।


2. पहला मोड़: एक अंधेरी रात

पर किस्मत ने अचानक करवट ली।
एक रात अर्जुन को तेज़ बुखार आ गया।

अर्जुन (कमज़ोर आवाज़ में):

“माँ… बहुत ठंड लग रही है।”

सरिता ने प्यार से उसके माथे पर हाथ रखा — तपता हुआ था।

सरिता (चिंतित होकर पति से):

“रमेश, जल्दी से गाड़ी का इंतज़ाम करो। अर्जुन को अस्पताल ले चलना होगा।”

लेकिन गाँव में रात को गाड़ी मिलना मुश्किल था। बारिश से रास्ते खराब थे।
बच्चा तड़प रहा था… माँ तड़प रही थी… पर मदद बहुत दूर थी।

सरिता ने बेटे को गोद में लेकर दौड़ने की कोशिश की, पर जब तक शहर पहुँचतीं — अर्जुन माँ की बाहों में ही हमेशा के लिए सो चुका था।

डॉक्टर (अस्पताल में धीमे स्वर में):

“माफ़ कीजिए, बहुत देर हो चुकी है।”

उस रात सरिता का पूरा आसमान टूट गया।


3. समय का घाव और नई उम्मीद

समय के साथ जख्म तो भरते हैं, पर निशान रह जाते हैं।
अब सरिता की पूरी ज़िंदगी सिर्फ गुड़िया के लिए थी।

वह हर छोटी तकलीफ़ पर घबरा जातीं।
हर बुखार, हर खाँसी उसे अर्जुन की आखिरी रात की याद दिलाती।

इसी बीच गाँव में एक नई शुरुआत हुई — टेलीमेडिसिन सेवा।
गाँव के हेल्थ सेंटर में एक बड़ी स्क्रीन और इंटरनेट की मदद से अब लोग डॉक्टर से ऑनलाइन जुड़ सकते थे।

ग्राम प्रधान:

“अब हमारे गाँव में भी इलाज दूर नहीं है। अब डॉक्टर हमसे बस एक स्क्रीन की दूरी पर हैं।”

पर सरिता के दिल से डर गया नहीं था।
वह सोचतीं — “क्या ये वाकई भरोसेमंद है?”


दूसरा मोड़: फिर वही डर

एक दिन गुड़िया को तेज़ बुखार आ गया।
सरिता की चीख निकल गई।

सरिता (कांपती आवाज़ में):

“हे भगवान! फिर से वही न हो जाए…”

राधा, पड़ोसन, दौड़ी आई।

राधा:

“दीदी, घबराइए मत। हेल्थ सेंटर चलिए। डॉक्टर से अभी बात हो सकती है।”

सरिता काँपते हाथों से गुड़िया को लेकर हेल्थ सेंटर पहुँचीं।


5. उम्मीद की स्क्रीन

हेल्थ सेंटर के छोटे से कमरे में कंप्यूटर स्क्रीन पर एक डॉक्टर लाइव थे।
हेल्थ वर्कर संजय ने तुरंत स्थिति बताई।

डॉक्टर (स्क्रीन से):

“नमस्ते माताजी, चिंता मत कीजिए। बच्ची को कैमरे के पास लाइए। मैं जाँच करता हूँ।”

डॉक्टर ने गुड़िया का चेहरा ध्यान से देखा, कुछ सवाल पूछे:

डॉक्टर:

“कितने दिन से बुखार है?”
“उल्टी या दस्त तो नहीं हुए?”
“सांस लेने में दिक्कत तो नहीं?”

सरिता घबराते हुए हर सवाल का जवाब देतीं रहीं।

डॉक्टर ने तुरंत दवाइयाँ लिखीं और कहा:

डॉक्टर:

“आपको अभी घबराने की जरूरत नहीं है। दवाइयाँ समय पर दीजिए और अगर कोई दिक्कत लगे तो हमें फिर से वीडियो कॉल करिए। हम साथ हैं।”

सरिता के गालों पर आँसू बह निकले, लेकिन इस बार ये आँसू उम्मीद के थे।


6. नई सुबह

कुछ ही दिनों में गुड़िया की तबीयत में सुधार होने लगा।
उसकी हँसी फिर से आँगन में गूंजने लगी।

एक सुबह राधा ने सरिता को देखकर कहा:

राधा (हँसते हुए):

“दीदी, देखो आपकी गुड़िया फिर से उड़ने लगी है!”

सरिता ने गुड़िया को गोद में उठाया और आसमान की तरफ देखते हुए बुदबुदाईं:

सरिता:

“थैंक यू भगवान… थैंक यू डॉक्टर साहब… थैंक यू टेलीमेडिसिन। इस बार मैंने अपनी दुनिया को फिर से मुस्कुराते देखा है।”


आज सरिता गाँव की हर माँ को समझाती हैं:

सरिता:

“डर मत कर बहन… अब इलाज हमारी पहुँच में है।
अब बेटियाँ और बेटे समय पर बच सकते हैं।
अब उम्मीद बस एक स्क्रीन की दूरी पर है।”

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