
क्या आपको दांतों में अक्सर दर्द या छेद महसूस होते हैं? क्या आपके बच्चे को मीठा खाने के बाद दांत में हल्की सी सेंसिटिविटी होती है?
अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 60% से ज़्यादा बच्चों और 85% वयस्कों को कैविटी या दांतों की सड़न की समस्या होती है। यह एक आम लेकिन गंभीर समस्या है, जिसे अगर समय पर नहीं रोका गया तो इसका असर पूरे शरीर की सेहत पर पड़ सकता है।
आइए जानते हैं:
- भारत में कैविटी क्यों आम है?
- इसे कैसे रोका जा सकता है?
- अगर कैविटी हो गई है तो क्या करें?
भारत में कैविटी के मुख्य कारण:
- मीठा और चिपचिपा खाना – लड्डू, मिठाई, चॉकलेट, ठंडी ड्रिंक्स और शक्कर वाली चाय हर दिन का हिस्सा हैं।
- दांतों की सही सफाई ना करना – सिर्फ दिन में एक बार ब्रश करना, या सही तरीके से ब्रश न करना।
- डेंटल चेकअप की कमी – अधिकतर लोग तभी डेंटिस्ट के पास जाते हैं जब बहुत दर्द हो जाए।
- ग्रामीण इलाकों में सुविधाओं की कमी – आज भी बहुत से इलाकों में अच्छी डेंटल क्लिनिक की सुविधा नहीं है।
- घरेलू नुस्खों पर ज़्यादा भरोसा – जो कभी-कभी इलाज में देरी कर देते हैं।
कैविटी से बचाव के आसान तरीके:
- दिन में दो बार फ्लोराइड टूथपेस्ट से ब्रश करें।
- रोजाना फ्लॉस करें ताकि दांतों के बीच की सफाई हो।
- मीठा और सॉफ्ट ड्रिंक्स कम करें, खासकर बच्चों में।
- खाने के बाद साफ पानी से कुल्ला करें।
- हर 6 महीने में डेंटिस्ट से नियमित चेकअप करवाएं।
- बच्चों को बचपन से सही डेंटल हैबिट्स सिखाएं।
अगर कैविटी हो गई हो तो क्या करें?
- इग्नोर बिल्कुल न करें।
अगर आपको लगे: - दांत में दर्द या ठंडा-गर्म लग रहा है,
- दांत में छेद सा दिख रहा है,
- मुंह से दुर्गंध आ रही है,
तो ये कैविटी के संकेत हो सकते हैं।
समय पर इलाज न कराने से:
- इंफेक्शन हो सकता है,
- रूट कैनाल की ज़रूरत पड़ सकती है,
- या दांत निकालना भी पड़ सकता है।